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झारखंड में अगली सरकार महगठबंधन की और हेमंत सोरेन होंगे मुख्यमंत्री

झारखंड विधानसभा चुनाव: जनता नहीं चली मोदी के साथ, आ गई हेमंत सरकार

झारखंड. झारखंड विधानसभा चुनाव का परिणाम आ रहा है. सुबह जो हल्का कोहरा था वो दोपहर होते-होते छंट गया. झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरेजेडी के खेमे में गर्मी आ गई है. जीत की गर्मी. सत्ता में वापसी की गर्मी. पार्टी दफ्तरों के बाहर पटाखे फोड़े जा रहे हैं. लड्डू खाए और खिलाए जा रहे हैं.

वहीं सत्ता की दौड़ में पीछे छूटते रघुवर दास और उनकी पार्टी बीजेपी का खेमा मायूस है. ज़मीन पर घूमते हुए और चुनाव को क़रीब से देखते हुए ये आसानी से महसूस हो रहा था कि जनता में राज्य की बीजेपी सरकार और ख़ासकर मुख्यमंत्री रघुवर दास को लेकर गहरी नाराज़गी है.

अब तक जो रुझान सामने आए हैं उससे साफ़ है कि झारखंड में अगली सरकार महगठबंधन की होगी और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री होंगे.

दोपहर बारह बजे तक चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक़ ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन 3, बीजेपी 28, सीपीआई (एम-एल) 1, निर्दलीय 2, कांग्रेस 13, झारखंड मुक्ति मोर्चा 24, झारखंड विकास मोर्चा 4, एनसीपी 1 और आरजेडी 5 सीटों पर आगे चल रही है.

लेकिन अगर निजी टीवी चैनलों की माने तो महगठबंधन को 41 सीटों पर बढ़त मिल चुकी है. ये वहीं जादुई आंकड़ा है जो इस राज्य में सरकार बनाने के लिए चाहिए.
अब सवाल उठता है कि लोकसभा में भारी जीत दर्ज करने वाली, मीडिया की माने तो अमित शाह जैसे ‘चाणक्य’ के होने और ‘चलो चलें मोदी के साथ’ का नारा पूरे राज्य में देने के बाद भी बीजेपी हार कैसे गई? सत्ता से बाहर कैसे हो गई?

सवाल ये भी है कि इस चुनाव को बीजेपी पार्टी के ख़िलाफ़ जनादेश माने या मुख्यमंत्री रघुवर दास को लेकर जनता में जो नाराज़गी है, उस वजह से ये परिणाम आए हैं?

पहले सवाल का जवाब ये है कि राज्य में रघुवर दास को लेकर उनकी सरकार को लेकर लोगों में भारी नाराज़गी थी. लोग चुनावी रैलियों में. नेताओं के भाषाण में अपने मुद्दे सुनना चाह रहे थे. वो सत्ता पक्ष से ये उम्मीद कर रहे थे कि वो सरकार द्वारा किए गए कामों का ज़िक्र करें.

बीजेपी के केंद्रीय नेताओं से उम्मीद थी कि वो रघुवर दास को किनारा करेंगे. इससे उलट पीएम मोदी अपनी सभाओं में रघुवर दास को रखते थे. देश-दुनियां के मुद्दों पर बोलते थे. वो भाषाण की शुरुआत स्थनीय भाषा में एक या दो लाइन बोलकर जरूर करते थे लेकिन उनके भाषाण स्थनीय मुद्दों का ज़िक्र कम होता था.

अमित शाह हैं. उनकी रननीति झारखंड में फ़ेल होती हुई दिख रही है. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे सरयू राय की माने तो झारखंड में रघुवर दास, ख़ुद को अमित शाह से भी ज़्यादा शक्तिशाली मानते हैं.

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