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हरियाणा सरकार खतरे में JJP विधायक बोले- चुपके से मॉल में हुआ गठबंधन, हमें पता नहीं था

JJP और बीजेपी का गठबंधन हमारी पार्टी के अधिकतर नेताओं की जानकारी के बगैर हुआ था: विधायक

हरियाणा. हरियाणा की खट्टर सरकार खतरे में पड़ सकती है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिस दल के साथ मिलकर हरियाणा में सरकार चला रही है उस में घमासान मच गया है. दरअसल हरियाणा में बीजेपी के साथ सरकार में शामिल जननायक जनता पार्टी (JJP) के उपाध्यक्ष और विधायक रामकुमार गौतम ने पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया है. गौतम ने पार्टी अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला को धमकी देते हुए कहा है कि उन्हें यह नहीं भूलना नहीं चाहिए कि वह पार्टी विधायकों की वजह से उप-मुख्यमंत्री बने हैं. इसी के साथ उन्होंने दुष्यंत द्वारा बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर भी दुख जाहिर किया है.

JJP विधायक रामकुमार गौतम ने कहा, ‘JJP और बीजेपी का गठबंधन हमारी पार्टी के अधिकतर नेताओं की जानकारी के बगैर हुआ था. मैं बहुत दुखी हूं कि उन लोगों ने एम्बियंस मॉल में गठबंधन को लेकर बातचीत की थी और जब हमें इसका पता चला तो हमें बहुत बुरा लगा. जनता को दुख पहुंचा और सभी विधायक दुखी थे. सभी अच्छे विभाग दुष्यंत ने ले लिए. बाकी दूसरे विधायकों का क्या. क्या उन लोगों को जनता ने वोट नहीं दिया.’

रामकुमार नारनौंद विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. कहा जा रहा है कि गौतम ने मंत्री न बन पाने की नाराजगी में इस्तीफा दिया है. नवंबर में हुए पहले मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे प्रबल दावेदार होने के बावजूद राम कुमार मंत्री नहीं बनाया गया था.

बुधवार को विधानसभा क्षेत्र नारनौंद की एक खाप पंचायत में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफे का ऐलान करने वाले राम कुमार गौतम ने कहा कि कानून (दल-बदल) के कारण वह पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं. पार्टी छोड़ने पर विधायकी चली जाएगी. चूंकि लोगों ने उन्हें विधायक चुना है, वे इस नाते उनकी सेवा करते रहेंगे. राम कुमार गौतम ने जेजेपी और दुष्यंत पर तंज करते हुए कहा, “मुझे तो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना रखा था पर पार्टी तो क्षेत्रीय है, इस नाते पद छोड़ रहा हूं. पार्टी का सदस्य और विधायक बना रहूंगा.”

बता दें कि हरियाणा में बहुमत से चूकी बीजेपी ने 27 अक्टूबर को दुष्यंत चौटाला की पार्टी से गठबंधन कर सरकार बनाई थी. फिर नवंबर में पहला कैबिनेट विस्तार होने से पहले सबसे वरिष्ठ विधायक और पार्टी के संस्थापक सदस्य राम कुमार गौतम का मंत्री बनना तय माना जा रहा था, मगर छह कैबिनेट और चार राज्य मंत्रियों की लिस्ट में उनका नाम नहीं रहा. जिसके बाद से राम कदम खुद को पार्टी में उपेक्षित मान रहे थे.

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