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आर्टिकल 370: कश्मीर में लगीं पाबंदियों पर SC बोला: बिना वजह इंटरनेट पर बैन नहीं हो सकता

नेता गुलाम नबी आजाद और अन्य की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली. जम्मू कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान खत्म करने के सरकार के निर्णय के बाद इस पूर्व राज्य में लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद और अन्य की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राजनीति में दखल देना हमारा काम नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कश्मीर में हिंसा का काफी लंबा इतिहास रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा काम आजादी और सुरक्षा में तालमेल रखना है। वहीं घाटी में इंटरनेट बंद पर कोर्ठ ने कहा कि बिना वजह पूरी तरह से इंटरनेट पर बैन नहीं लगाया जा सकता।

बता दें कि न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पिछले साल 27 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी। केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान समाप्त करने के बाद वहां लगाए गए प्रतिबंधों को 21 नवंबर को सही ठहराया था।

केन्द्र ने न्यायालय में कहा था कि सरकार के एहतियाती उपायों की वजह से ही राज्य में किसी व्यक्ति की न तो जान गई और न ही एक भी गोली चलानी पड़ी। गुलाम नबी आजाद के अलावा, कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन और कई अन्य ने घाटी में संचार व्यवस्था ठप होने सहित अनेक प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं।

केन्द्र सरकार ने पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अनेक प्रावधान खत्म कर दिए थे। खुद को मंत्री बताकर गोवा के गेस्ट हाउस में 12 दिन रहा शख्स, मिनिस्टर से मीटिंग भी कर ली

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