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इस वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर हुआ सबसे बड़ा खुलासा, उड़ जाएंगे सभी के होश

बिहार चुनाव में बहुत जल्द सीट बंटवारे पर सबकी राहें जुदा हों

बिहार. बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में नेतृत्व को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नीत महागठबंधन के घटक दलों में अभी से फंसे पेंच और राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने को लेकर आज कहा कि इनके बीच बहुत जल्द सीट बंटवारे के समय भी सबकी राहें अलग-अलग होंगी.

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने यहां कहा कि अभी तो तथाकथित महागठबंधन में चेहरे को लेकर फसाद हो रहा है, लेकिन बहुत जल्द सीट बंटवारे पर सबकी राहें जुदा होंगी. प्रदेश की राजनीति में दो दशक से संजीवनी बने राजद को न सिर्फ कांग्रेस राज्य में नेतृत्व को लेकर ठेंगा दिखा रही है बल्कि वर्तमान गठबंधन को भी स्वीकार करने से कतरा रही है. पांडेय ने बताया कि कांग्रेस ने साफ कह दिया है कि अभी तो गठबंधन होना बाकी है, तो चेहरे की बात कैसे की जाए. उन्होंने कहा कि हाल यह है कि कांग्रेस को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद कतई पसंद नहीं हैं. उन्होंने कहा कि राजद नेता तेजस्वी यादव के मन में मुख्यमंत्री बनने को लेकर भले ही लड्डू फूट रहे हों लेकिन किसी भी परिस्थिति में न तो अपने साथी दल और न ही राज्य की जनता को उनका नेतृत्व स्वीकार्य हैं.

वहीं बिहार भाजपा प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, वास्तव में अपनी अनुभवहीनता के कारण गांधी की ही तरह तेजस्वी ने भी अपने इर्द-गिर्द परिक्रमा करने वाले नेताओं की एक मंडली जमा कर रखी है. लोग बताते हैं कि इस मंडली के लोग अब इतने प्रभावी हो गये हैं कि पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों में भी इनका दखल होने लगा है. यही लोग तय करते हैं कि पार्टी में किसकी हैसियत क्या रहेगी. इसी वजह से वर्षों से पार्टी का दामन थामे नेता उपेक्षित महसूस करने लगे हैं. उन्हें अपना भविष्य अब अंधकारमय दिखने लगा है. समय के साथ यह कलह और बढऩे वाली है और आगे चल कर राजद में टूट पड़ जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी की कमान अपने हाथों में लेने के बाद तेजस्वी यादव ने जिस तरह गांधी की राह पकड़ी है, उसी के कारण आज राजद का बंटाधार हो रहा है. लोकसभा चुनावों में राजद को मिली आज तक की सबसे करारी हार, पार्टी को बीच मंझधार में छोड़ गुप्त छुट्टियों में व्यस्त रहना और जबरदस्ती की तानाशाही जैसी उनकी आदतों से राजद के आम नेता आजिज आ चुके हैं. इसके बाद भी तेजस्वी यादव का ठीक गांधी की तरह बेपरवाह और गैरजिम्मेवार दिखना कहीं से भी राजद के भविष्य के लिए सही नही दिखता है.

उल्लेखनीय है कि राजद में नंबर दो की हैसियत रखने वाले वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष यादव को तीन दिन पूर्व एक पत्र लिखकर पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सिंह ने पत्र में लिखा है कि बिहार में विधानसभा का चुनाव होने में अब 300 दिन का समय बचा है, लेकिन पार्टी की बूथ स्तरीय, पंचायत, प्रखंड, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय कार्यसमिति का भी गठन नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि संगठन के बिना संघर्ष और संघर्ष के बिना संगठन मजबूत नहीं हुआ करता है.

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