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गुजरात की आदिवासी युवती ने रणुजा में बाबा रामापीर के मंदिर के पीछे ली जल समाधि

पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मृतका का शव उसके परिजनों को सौंपा

अहमदाबाद. गुजरात की एक आदिवासी युवती ने राजस्थान के रणुजा में बाबा रामापीर के मंदिर के पीछे वावड़ी में जल समाधि ले ली है. पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मृतका का शव उसके परिजनों को सौंप दिया है. मृतका खुद को बाबा रामापीर की बहन बताया करती थी. संभवता उसी मनोदशा में उसने यह कदम उठाया. उसका पूरा परिवार भी रामापीर का भक्त है.

गुजरात के भरुच जिले की नेत्रंग तहसील के भगोरी गांव में रहते किसान छोटुभाई फते सिंह वसावा अपनी पत्नी और दो पुत्री तथा एक पुत्र के साथ रहते है. उनका पूरा परिवार रामापीर का भक्त है. बाबा रामापीर में उनकी परम आस्था है. उनकी छोटी पुत्री सगुणा ने (22) गांव की स्कूल में आठवीं तक पढ़ाई की है. वह खुद को रामापीर की बहन बताती थी. रातदिन रामापीर के स्मरण करती थी. गत नौ जनवरी को गांव के लोग एक निजी बस कर राजस्थान के रणुजा रामापीर के मंदिर दर्शन के लिए निकले थे.

सगुणा भी गांववालों के साथ रणुजा रामापीर के दर्शन के लिए गई थी. जाते समय उसने अपने समाधि लेने के संकेत दिए थे, लेकिन कोई समझ नहीं सका था. यात्रा संघ के रणुजा में दो दिन रुकने के दौरान सगुणा रामापीर को फूल-माला चढ़ाती थी और दूसरे दिन आरती का प्रसाद सगुणा अपने हाथों से सबको बांटा और अपने मां-बाप के लिए भी भिजवाया. इसके बाद उसने मंदिर के पीछे स्थानक वावड़ी में जिंदा जल समाधि ले ली.

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस का काफिला आ पहुंचा. पुलिस व फायरब्रिगेड ने सगुणा का शव बाहर निकाला. पुलिस ने कार्रवाई करने के बाद गुरुवार को उसका शव उसके वतन भोगोरी गांव में उसके परिवार वालों को सौंपा. सगुणा के पिता छोटु भाई के पिता बताया कि सगुणा खुद को बाबा रामापीर की बहन मानती थी. उसकी अंतिम यात्रा में उसके गांव सहित आसपास के गांव वाले भी शामिल रहे है. सगुणा की अंतिमयात्रा भजन कीर्तन करते हुए निकाली गई. गांववालों ने उसकी याद में खेत में एक भव्य मंदिर निर्माण करने का संकल्प किया है. इसके लिए लोगों ने दान देने की भी बात की है.

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