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सोमानी अपहरण कांड / सूरत जेल में रची साजिश, 3 माह रेकी के बाद अपहरण

उद्योगपति के अपहरण की साजिश गुजरात के सूरत शहर की जेल में रची गई थी

रायपुर: राजधानी रायपुर के उद्योगपति के अपहरण की साजिश गुजरात सूरत की जेल में रची गई। पप्पू और मुन्ना के अलावा दो और गिरोहबाज अलग-अलग हत्या के केस में वहां चार-पांच साल बंद रहे। उसी दौरान उन्होंने कोई बड़ा हाथ मारने की प्लानिंग की। पप्पू पहले चंदन सोनार गैंग का सदस्य रह चुका था। इसलिए उसने अपहरण का प्लान बनाया। करीब छह महीने पहले पप्पू, मुन्ना और दो अन्य थोड़े थोड़ अंतराल में जमानत पर छूटे और बाहर आकर उन्होंने सोमानी के अपहरण का प्लान बनाया।

जेल से छूटने के बाद पप्पू रायपुर आया। यहां वह पहले भी आ चुका था। दौंदे में उसका रिश्तेदार अरुण में रहता है। अरुण के जरिये उसे पता चला कि सिलतरा में बड़े बड़े उद्योगपति रहते हैं। उनसे मोटी रकम वसूली जा सकती है। उसके बाद पप्पू ने अपने साथियों को पूरी जानकारी दी। फिर उन्होंने गूगल से सर्वे किया कि यहां कौन कौन बड़े उद्योगपति हैं जो मालदार हैं। उसके बाद ही उन्होंने प्रवीण का चयन किया।

प्रवीण का अपहरण करना तय होने के बाद उन्होंने करीब तीन महीने तक उसकी रेकी की। फैक्ट्री और घर तक उसका पीछा किया। ये भी देखा कि वह कहां कहां आता जाता है। 8 जनवरी की शाम प्रवीण जब फैक्ट्री से निकले तब दो कारों में उन्होंने उसका पीछा किया और वहीं फैक्ट्री के पास शारडा एनर्जी के करीब उनकी कार रोकी और खुद को ईडी का स्टाफ बताकर उनकी गाड़ी में बैठ गए। कुछ दूर जाने के बाद उन्हें अपनी कार में बिठाकर ले गए।

अपहरणकर्ताओं ने वारदात के चौथे दिन से फिरौती के लिए कॉल करना शुरू कर दिया था।

उन्होंने प्रवीण से पत्नी का नंबर लिया और सीधे उसी से बात की।

कॉल करने के लिए अपहरणकर्ता गैंग का एक सदस्य
हरियाणा के सोमानी से फोन किया।

दूसरा कॉल बिहार वैशाली से किया।
फिर यूपी के अलग-अलग शहरों से कॉल आने लगे।

हर बार फोन करने वाला अलग होता और नंबर भी नया रहता था।

डीजीपी ने एसएसपी आरिफ से कहा था- सारे काम छोड़ दो

प्रवीण सोमानी के अपहरण के दूसरे ही दिन डीजीपी डीएम अवस्थी ने रायपुर आईजी डा. आनंद छाबड़ा और एसएसपी आरिफ शेख को बुलाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने एसएसपी आरिफ से कह दिया कि सारे काम छोड़कर बस एक काम में लग जाओ। डीजीपी अवस्थी रोज पुलिस अफसरों से जानकारी ले रहे थे कि प्रवीण सोमानी केस की जांच कहां तक पहुंची। जांच के बिंदुओं की जानकारी लेने के बाद वे खुद अपनी ओर से टिप्स दे रहे थे। गौरतलब है कि रायपुर में एसएसपी रहते हुए डीजीपी अवस्थी ने 65 लाख रुपए की सहकारी बैंक डकैती जैसे बड़े केस सुलझाए थे। उन्होंने एक बड़े गैंग का खुलासा करते हुए असम से सरगना नसिबुद्दीन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था। रायपुर के यूपी और बिहार से क्राइम कनेक्शन की बारीकी से पड़ताल की है। इस वजह से वे अफसरों को दिशा दे रहे थे।

चंदन से अलग होकर पप्पू ने बनाया गिरोह, कई राज्यों के अपराधी जोड़े

डीजीपी अवस्थी ने बताया कि पप्पू चौधरी चंदन सोनार गिरोह का मुख्य सदस्य था। वह सूरत अपहरण में पकड़ा गया था। जहां उसने जेल में रहते हुए अपनी खुद का गैंग बना लिया। इसमें गुजरात, ओडिशा, बिहार, यूपी और कर्नाटक के लोगों को शामिल किया। पप्पू ने अंबेडकर नगर में प्रवीण को छिपाकर रखा था, लेकिन वह खुद वैशाली में घूम रहा था। ताकि पुलिस का फोकस और जांच बिहार में रहे। इसलिए उसने बिदुपुर से फिरौती के लिए कॉल भी कराया।

अपहरण में शामिल गैंग

पप्पू चौधरी बिद्दीपुर वैशाली बिहार, शिशिर ओडिशा गुंजाम, तूफान कालिया गुंजाम ओडिशा, सुमन कुमार नालंदा, अनिल चौधरी, बाबू प्रदीप भुइंया, अजमल अंबेडकर नगर यूपी, आफताब नेता अंबेडकर नगर, अंकित बेंगलुरु, मुन्ना नायक ओडिशा अपहरणकांड में शामिल थे। इनमें से अनिल चौधरी और मुन्ना नायक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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