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राजिम मेला के लिए 25 एकड़ जमीन चिन्हांकित, अगले साल से नदी पर नहीं लगेगा मेला

छत्तीसगढ़ की धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को संजोया जाएगा

राजिम. राजिम माघी पुन्नी मेला में संत समागम में धर्मस्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने वृन्दावन के महामंडलेश्वर योगी नवल गिरी महाराज सहित अनेक साधु-संतों का सम्मान किया और प्रदेश की खुशहाली के लिए उनका आशीर्वाद लिया. इस अवसर पर धर्मस्व मंत्री ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला में पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी छत्तीसगढ. की संस्कृति, पारंपरिक खेल, तीज त्यौहार और व्यंजनों को समावेश कर मेले की मूल पहचान को लौटाने का प्रयास किया गया है.

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में मेला चिन्हित स्थान पर लगाया जाएगा. इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा 25 एकड़ जमीन चिन्हांकन कर लिया गया है. उन्होने कहा कि इस नए मेला स्थल में श्रद्धालुओं और साधु संतो के लिए आश्रम, आवास और अन्य सुविधाए विकसित किया जाएगा. इसके साथ ही मेला स्थल पर छत्तीसगढ़ की धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को संजोया जाएगा. सुव्यवस्थित मेला आयोजन के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी.

संत समागम में वृंदावन से आये योगी नवलगिरी जी महाराज ने सुव्यवस्थित मेला आयोजन की सराहना की. उन्होने कहा कि इस मेले में छत्तीसगढ़ी संस्कृति का समावेश करने से यह मेला और भी भव्य हो गया है. उन्होने मेला आयोजन के लिए राज्य शासन को बधाई दी. अयोध्या से पधारे जालेश्वर महाराज ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ सरकार पुनः अपनी मौलिक संस्कृति की ओर लौट रही है. उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी जैसी अच्छी योजना शुरू की है.

इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. समारोह में योगीराज स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद (अक्रिय) महाराज-जोधपुर, महंत जालेश्वर महाराज अयोध्या, महंत रामसुन्दरदास महाराज अध्यक्ष श्रीराजीव लोचन मंदिर, संस्कृताचार्य पंडित रामहेतु गर्ग शास्त्री सतना (मध्य प्रदेश), महंत साध्वी प्रज्ञा भारती संरक्षक वेदरतन सेवा प्रकल्प छत्तीसगढ़, पंडित ऋषिराज त्रिपाठी-प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), महंत उमेशानंद गिरी जी महाराज नवागांव (बुढ़ेनी) सहित विशिष्ट साधु-संत की उपस्थित थे.

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