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प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने बच्चों को कराया गया स्वर्ण प्राशन

सोलह संस्कारों में से एक है स्वर्ण प्राशन संस्कार : बच्चों की स्मरण शक्ति और पाचन शक्ति के लिए फायदेमन्द

दुर्ग: हमारे विद्वानों ने ठीक ही कहा है पहला सुख निरोगी काया अगर शरीर निरोग है तो इससे बड़ी नियामत दूसरी नहीं।

इसलिए छोटी उम्र से ही बच्चों को स्वस्थ और निरोगी रखने के लिए प्रयास जरूरी है ताकि आगे चलकर पढ़ाई ,खेलकूद ,करियर से लेकर तमाम चीजों पर प्रभाव न पड़े।

आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में सबसे बड़ी समस्या है प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना जिसके कारण बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं, बीमारी से शरीर कमजोर होता ही है पढ़ाई का नुकसान अलग से।

सदियों पहले आयुर्वेद में 1 से 16 साल के बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए स्वर्ण प्राशन को 16 संस्कारों में शामिल किया गया।

इसी प्राचीन विधा को पुनर्जीवित करने का कार्य मोहनलाल बाकलीवाल शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय द्वारा किया जा रहा है। यहाँ हर महीने पुष्य नक्षत्र के दिन शिविर का आयोजन कर 1 से 16 साल तक के बच्चों को निःशुल्क स्वर्ण प्राशन करवाया जाता है।

इसी कड़ी में विगत 6 मार्च को आयोजित शिविर में करीब 300 बच्चों को स्वर्ण प्राशन करवाया गया। शिविर का शुभारंभ जिला आयुर्वेद अधिकारी के के शर्मा द्वारा किया गया।

उन्होंने स्वर्ण प्राशन का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन के 16 संस्कारों में शामिल स्वर्ण प्राशन में औषधि मिश्रित स्वर्ण भस्म का प्राशन करवाया जाता है।

स्वर्ण प्राशन से बच्चों के शारीरिक मानसिक और बौद्धिक विकास में सहायक है। इससे ओज, मेधा और वर्ण में वृद्धि होती है। शिविर में पालकों और शिक्षकों को भी स्वर्ण प्राशन का महत्व बताया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अमित कुमार द्विवेदी, डॉ. जया साहू, डॉ. लक्ष्मी मारकण्डेय एवं डॉ. एकता चंद्राकर स्वर्ण प्राशन कराया गया।

कोरोना वायरस प्रतिरोधी होमियोपैथिक दवा का वितरण-जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में विगत 15 दिनों से कोरोना वायरस प्रतिरोधक दवा का वितरण किया जा रहा है। आम नागरिक निःशुल्क रूप से यह दवा प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में भी 78 लोगों को दवा पिलाई गई।

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