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फिर शराब की कीमतों में 5 से 30 रुपए तक बढ़ोतरी हुई

Liquor prices again increased, price hike from 5 to 30 rupees

जयपुर: राज्य सरकार अब प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं की जंग शराब पर लगाकर लड़ने की तैयारी में है. राज्य सरकार ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी कर शराब की विभिन्न किस्म और पैकिंग पर 5रुपए से लेकर 30 रुपए तक की वृद्धि कर दी है. इसका असर उपभोक्ताओं पर मंगलवार से ही पड़ना शुरू हो गया है. राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सूखा, बाढ़, महामारी जन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए शराब पर सर चार्ज लगाया गया है. जारी अधिसूचना के अनुसार अंग्रेजी शराब के पव्वे पर 5 रुपए, अद्धे पर 5 रुपए और बोतल पर 10 रुपए की वृद्धि की गई है.

उपभोक्ता के बीच दरों को लेकर गफलत:

इसी तरह ब्रीज़र पर 5 रुपए, मिनिएचर और अन्य पैकिंग पर 5 रुपए और बीयर की बोतल पर 20 रुपए की वृद्धि की गई है. छोटी बीयर पर 5 रुपए की वृद्धि की गई है. देसी शराब के प्रति पव्वे और राजस्थान निर्मित शराब के प्रति पव्वे पर डेढ़ रुपए सरचार्ज लगाया गया है.

आदेश में यह भी कहा गया है कि रिटेलर से यह राशि खरीदारी के समय ही वसूल की जाएगी और रिटेलर इस राशि को उपभोक्ता से वसूलेगा. बड़ी बात यह है कि सर चार्ज की राशि एमआरपी यानी अधिकतम खुदरा मूल्य में शामिल नहीं होगी ऐसे में लाइसेंसी और उपभोक्ता के बीच दरों को लेकर गफलत ही रहेगी.

खजाना भरने के लिए शराब की दरों में लगातार वृद्धि:

इससे लाइसेंसी और ग्राहक के बीच तनाव बढ़ेगा. ध्यान रहे राज्य सरकार ने बीते वित्त वर्ष में अंग्रेजी शराब की दरों में 4 बार वृद्धि की थी और चालू वित्त वर्ष में दो बार वृद्धि की जा चुकी है. एक साल पहले जो शराब 100 रुपए की मिलती थी उसकी कीमत आज 200 रुपए से ज्यादा हो चुकी है सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि राज्य सरकार खजाना भरने के लिए शराब की दरों में लगातार वृद्धि कर रही है.

इससे उपभोक्ता को तो अपना शौक पूरा करने के लिए मोटी राशि चुकानी पड़ रही है साथ ही लाइसेंसी के लिए शराब बेचना मुश्किल हो गया है. सूत्रों की मानें तो सरकार शराब की दर बढ़ाकर राजस्व कमाना चाहती है जबकि हो इससे उलट रहा है. शराब की दर बढ़ने से शराब की बिक्री में कमी आई है ऐसी स्थिति में लाइसेंसी के लिए अपने राशि निकालना मुश्किल हो गया है और उपभोक्ता पर भी भार पड़ रहा है.

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