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हॉन्गकॉन्ग: नए चीनी क़ानून के तहत हुई पहली गिरफ़्तारी

चीन सरकार उनके यहाँ काम कर रहे अमरीकी मीडिया संस्थानों पर पारस्परिक प्रतिबंधों की घोषणा करेगी.

चीन

चीन के विदेश मंत्री ने बताया है कि चीनी सरकार ने चीन में काम कर रहे कुछ अमरीकी मीडिया संस्थानों से उनकी कार्य-प्रणाली से संबंधित ज़रूरी दस्तावेज़ पेश करने को कहा है.

चीन सरकार ने इन अमरीकी संस्थानों को सात दिन का समय दिया है.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान के अनुसार, एसोसिएटिड प्रेस, नेशनल पब्लिक रेडियो, सीबीएस और न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल से सात दिन में माँगी गई सूचनाएं देने को कहा गया है.

ग्लोबल टाइम्स

चीन के समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के एडिटर ने बुधवार सुबह इस संबंध में एक ट्वीट भी किया था.उन्होंने लिखा था कि “चीन सरकार उनके यहाँ काम कर रहे अमरीकी मीडिया संस्थानों पर पारस्परिक प्रतिबंधों की घोषणा करेगी.”

इससे पहले अमरीका ने जून महीने में कहा था कि ‘वो अन्य चार बड़े चीनी मीडिया संस्थानों को अब से चीन का प्रतिनिधि मानेगा.’अमरीका और चीन के बीच दो-तरफा खींचतान पिछले कुछ समय से जारी है.

दोनों तरफ से ही एक-दूसरे को परेशान करने वाले कुछ निर्णय लिये गए हैं और कोरोना वायरस महामारी की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है.’हॉन्गकॉन्ग में आज़ादी’ के नारे वाला पोस्टर लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए एक शख़्स को चीन द्वारा थोपे गये नए क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

नए क़ानून के तहत पहली गिरफ़्तारी

अधिकारियों के अनुसार, नए क़ानून के तहत ये पहली गिरफ़्तारी है.ब्रिटिश शासन समाप्त होने की 23वीं सालगिरह मनाने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी शहर में एकत्र हुए थे जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पहले पुलिस ने इन लोगों पर मिर्च का स्प्रे किया, बाद में उन्हें वहाँ से खदेड़ दिया गया.

चीन द्वारा हॉन्गकॉन्ग में लागू किया गया ‘राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून’ कथित तौर पर अलगाव, तोड़फोड़ और आतंकवाद में शामिल लोगों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है और इसके तहत जुर्म साबित होने पर आरोपी को जेल में उम्रकैद की सज़ा दी जा सकती है.

हॉन्गकॉन्ग शहर के नेता कैरी लैम

जबकि आलोचकों का कहना है कि चीन ने हॉन्गकॉन्ग के लोगों की आज़ादी छीनने के लिए इस विवादित क़ानून को लागू किया है, जिसकी चीन ने कभी गारंटी दी थी.
साल 1997 में हॉन्गकॉन्ग को ब्रिटेन ने चीन को वापस सौंप दिया था और उस वक़्त यह समझौता हुआ था कि चीन कम के कम पचास वर्ष तक हॉन्गकॉन्ग वासियों को प्राप्त कुछ स्वतंत्रताओं की रक्षा करेगा.

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि “चीन ने हॉन्गकॉन्ग के लोगों को 50 साल की आज़ादी का वादा किया था जिसे केवल 23 साल में ही चीन ने तोड़ दिया.”
हालांकि हॉन्गकॉन्ग शहर के नेता कैरी लैम ने कहा है कि ‘2019 में हुए व्यापक हिंसक प्रदर्शनों के बाद इस क़ानून से शहर में स्थिरता वापस लौटने में मदद मिलेगी.’
उन्होंने कहा, “ब्रिटेन के जाने के बाद, ये नया क़ानून चीन और हॉन्गकॉन्ग के संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी तब्दीली है. इससे स्थिरता आयेगी.”

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