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दिल्‍ली में सरेंडर कर सकता है विकास दुबे, आखिरी बार यहां देखा गया

विकास दुबे की मदद करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

नई दिल्‍ली: गैंगस्टर विकास दुबे दिल्ली-एनसीआर में छिपा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, फरार अपराधी विकास दुबे की तलाश में यूपी पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों के अलावा दिल्ली-एनसीआर में भी छापेमारी कर रही है। विकास एनकाउंटर के डर से बचने के लिए यूपी से बाहर कहीं और सरेंडर कर सकता है। यूपी पुलिस ने दिल्ली पुलिस से भी विकास की तलाश के लिए मदद मांगी है और दिल्ली की अदालतों के बाहर नजर रखने के लिए कहा है।

सूत्रों ने कहा कि यूपी पुलिस एटीएस दिल्ली पुलिस के संपर्क में है। जबकि यूपी पुलिस मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस के साथ संपर्क में है। सूत्रों ने कहा कि दुबे को आखिरी बार यूपी के बिजनौर में देखा गया था। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उनके सहयोगियों ने 3 जुलाई को पुलिस पर हमला किया, जिसमें 8 पुलिसकर्मी हताहत हो गए थे। विकास दुबे के सहयोगी दयाशंकर अग्निहोत्री ने पुलिस को जानकारी दी कि उन्हें छापे की सूचना पुलिस के पहुंचने से कम से कम 5 घंटे पहले मिली। इस घटना के बाद 40 से अधिक मामलों में अपराधी विकास दुबे गांव छोड़कर फरार है।

विकास दुबे की मदद करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। विकास दुबे की नौकरानी रेखा अग्निहोत्री को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। साथ ही विकास का एक साथी सुरेश वर्मा को पुलिस ने अरेस्ट किया है। इन तीनों के खिलाफ 120बी के तहत पुलिस ने की कार्रवाई की है। वहीं विकास दुबे के बहनोई दिनेश कुमार को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।

पुलिसकर्मी सस्‍पेंड

4 जून को कानपुर एसएचओ विनय तिवारी को ड्यूटी में लापरवाही पर निलंबित कर दिया गया था। जांच टीम ने कुछ पुलिसकर्मियों के साथ-साथ कानपुर एसएचओ विनय तिवारी के साथ दुबे से जुड़ी कॉल डिटेल मिली थी। दुबे को पकड़ने के लिए यूपी पुलिस द्वारा 25 से अधिक टीमों का गठन किया गया है।

कानपुर मुठभेड़

मुठभेड़ उस समय हुई जब एक पुलिस दल 47 वर्षीय गैंगस्टर विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए गया। विकास पर 60 मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या करने से लेकर अपहरण और डकैती तक के मामले हैं। चौबेपुर थाने के अंतर्गत बिकारू गांव में पुलिस टीम इस गैंगस्टर के ठिकाने तक पहुंचने वाली थी, लेकिन पहले से ही घात लगाए बदमाशों ने उनपर एके -47 बंदूकों से हमला कर दिया, जिसमें पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र मिश्रा, तीन उप-निरीक्षक और चार कांस्टेबल मारे गए। जबकि मुठभेड़ में दो अपराधी मारे गए। दुबे और उनके बाकी सहयोगी घटनास्थल से भागने में कामयाब हो गए।

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