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90% कोरोना मरीज घर पर ठीक हो रहे हैं, पर सबसे बड़ा सवाल…

होम आइसोलेशन कब खत्म होगा?

होम आइसोलेशन का मतलब क्या है? इसकी सलाह किसे दी जाती है?

  • अगर किसी मरीज में कोरोनावायरस संक्रमण का कोई लक्षण नजर आता है या वह किसी कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उसे जांच की सलाह दी जाती है। जब तक जांच के नतीजे नहीं आते, तब तक उस व्यक्ति को घर में सबसे अलग यानी आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है। नतीजे आने पर अगर वह कोरोनावायरस पॉजिटिव निकलता है तो लक्षणों के आधार पर डॉक्टर उसका इलाज करते हैं।
  • अगर लक्षण हल्के या मामूली हैं तो उसका इलाज घर पर ही हो सकता है। इसके लिए कोशिश की जाती है कि वह अन्य घरवालों के संपर्क में आकर उन्हें संक्रमित न करे। उसे अलग-थलग रहने को कहा जाता है, जिसे हम होम आइसोलेशन या क्वारैंटाइन में रहकर इलाज करना कहते हैं। इस दौरान मरीज को देखभाल करने वाले की सख्त आवश्यकता होती है, जो मरीज की दवा, खानपान एवं अन्य जरूरतों को पूरा करता है।

यह होम आइसोलेशन कब खत्म करना चाहिए?

  • आम तौर पर मरीजों को 14 से 17 दिन होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है। पर यह सब लक्षणों की प्रकृति और उनकी गंभीरता से तय होता है। फिर भी मानकर चलिए कि लक्षणों के दिखने पर कम से कम 14 दिन तक आइसोलेट रहना ही है।
  • जिन लोगों में संक्रमण के कोई लक्षण न हों, उनका होम आइसोलेशन वायरस के लिए जांच में पॉजिटिव आने के 10 दिन बाद खत्म हो सकता है। बेहतर होगा आपका इलाज कर रहे डॉक्टर या फिजिशियन से पूछकर आप तय करें कि आइसोलेशन खत्म कब करना है।
  • अगर मरीज को तीन दिन से बुखार नहीं आया है तो अगले 7 दिन में आप आइसोलेशन खत्म कर सकते हैं। धीरे-धीरे लक्षण खत्म होने लगते हैं और जब पूरी तरह खत्म हो जाते हैं तब भी कुछ दिन आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है।

क्या आइसोलेशन खत्म करने के लिए निगेटिव RT-PCR रिपोर्ट जरूरी है?

  • नहीं। आदर्श परिस्थितियों में 24 घंटे के अंतर से दो RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव आने पर होम आइसोलेशन खत्म करने को कहा जाता है। पर जिस तेजी से केस बढ़ रहे हैं और जांच करने वाली लैबोरेटरीज पर दबाव बढ़ रहा है, मरीज 14 दिन बाद बिना टेस्ट के भी आइसोलेशन खत्म कर सकता है।
  • होम आइसोलेशन का पीरियड 14 दिन होना चाहिए क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि वायरस की साइकल इतने दिन में पूरी हो जाती है और वह मर जाता है। एम्स-दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक यह वैज्ञानिक तरीके से साबित हो चुका है कि हल्के या मामूली लक्षणों की स्थिति में वायरस छह से सात दिन में खुद-ब-खुद मर जाता है।
  • विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अगर RT-PCR टेस्ट कराया तो मृत वायरस की वजह से रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है। भले ही शरीर में वायरस की डेडबॉडी हो, पर टेस्ट तो पॉजिटिव बताता है। पर उससे किसी और को इन्फेक्ट करने या वायरस ट्रांसमिशन का खतरा बिल्कुल भी नहीं रहता है।
  • यह ध्यान रखना जरूरी है कि जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है, उन्हें डॉक्टर आम तौर पर निर्धारित आइसोलेशन अवधि से ज्यादा आइसोलेशन में रहने को कह सकते हैं। उन्हें दोबारा टेस्टिंग के लिए भी कहा जा सकता है।

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