छत्तीसगढ़धार्मिक

भोलेनाथ का ऐसा धाम, जिसमें दूध चढ़ने पर दूध का रंग हो जाता है नीला

धमतरी से तकरिबन 54 किलोमीटर की दूरी पर सिहावा नगरी के घने दंडक वनों के बीच स्थित कोटेश्वर धाम की महिमा बड़ी निराली है। लोगों का मानना है कि यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग में भोलेनाथ का नीलकंठेश्वर रूप मौजूद है।

दूध का रंग हो जाता है नीला

सागर मंथन के वक्त जब हलाहल विष की उत्पति हुई और इस विष से सृष्टि का विनाश होने लगा तब भगवान शिव ने उस विष का पान करकर उसे अपने कंठ में रोक लिया तभी से भगवान शिव नीलकंठेश्वर कहलाये। मान्यता है कि भगवान के उस नीलकंठेश्वर का  रूप इस शिवलिंग में है। तभी इसमें दूध चढ़ाने पर दूध का रंग नीला पड़ जाता है।

रावण के पूर्वज करते थे पूजा अर्चना

जंगल के बीचोबीच स्थित इस स्वयंभू शिवलिंग की बहुत अद्भुत महिमा है। मान्यता है कि लंकापति रावण के पूर्वज भी इस की पूजा अर्चना करने आते थे।

 

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