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गांधी जयंती विशेष : आज से 100 साल पहले महात्मा गांधी ने छत्तीसगढ़ में रखे थे कदम जिलों में हुआ था गाँधी जी का आगमन

 

रायपुर। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन है। उनकी जयंती पर देशभर में उनको याद किया जा रहा है। जगह जगह कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में भी महात्मा गांधी से जुड़ी कई यादें हैं। महात्मा गांधी जी का दो बार छत्तीसगढ़ में आगमन हुआ था। प्रदेश में कई ऐसी धरोहरें हैं, जो बापू की यादें समेटे हुए हैं। तो चलिए आज के हमारे इस वीडियो में हम आपको गांधी जी के छत्तीसगढ़ आगमन के बारे में बताते है।

प्रथम बार छत्तीसगढ़ आगमन

राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी भी छत्‍तीसगढ से अछूते नहीं रहे। उनका यहां दो बार आगमन हुआ। प्रथम आगमन 20 दिसम्बर 1920 में तथा द्वितीय 22 नवम्बर आगमन 1933 में हुआ। 21 दिसम्‍बर 1920 को गांधी जी का धमतरी आगमन हुआ, पहुंचने पर नगर के मकइ बन्ध चौक पर गांधी जी का वहां के जनता ने बडे उत्‍साह से स्‍वागत किया। धमतरी में गांधी जी ने जामू/जानी हुसैन के बाडे में भाषण दिया। यहाँ उमर सेठ नामक व्यापारी ने गांधी जी को अपने कंधों पर बिठा कर मंच तक पहुँचाया। गांधी जी ने लोगो को कंडेल आंदोलन की सफलता के लिए बधाई दी। लगभग 1 बजे तक यह कार्यक्रम चला। धमतरी में गांधी जी के ठहरने की व्‍यवस्‍था नारायण राव मेघावाले के यहां की गइ थी. जहां उन्‍होंने रात्रि विश्राम किया।अपने इस प्रथम आगमन के दौरान गांधीजी ने रायपुर ब्राह्राणपारा स्थित आनंद समाज लाइब्रेर के प्रांगण में महिलाओं की एक सभा को सम्‍बोधित किया। इस सभा में महिलाओं ने बड़ी संख्‍या में हिस्सा लिया।

द्वितीय बार छत्तीसगढ़ आगमन

गांधीजी का द्वितीय छत्तीसगढ़ आगमन 22 नवम्‍बर. 1933 को दुर्ग जिले में हुआ। गांधी जी के साथ उनके निजी सचिव महादेव देसाई, ठक्कर बापा, कुमारी मीरा बेन तथा जमुनालाल बजाज की पुत्री मदालसा भी रायपुर आये। इस यात्रा में वे दुर्ग, धमतरी, भाटापारा, बिलासपुर आदि स्थानो पर गए। द्ववितीय आगमन का प्रमुख कारण हरिजनोद्धार था। परंतु यहां आने पर उन्हें पता चला कि हरिजनोद्धार का कार्य छत्तीसगढ़ में पहले से चल रहा है। जिसे 1917 में पंडित सुन्दरलाल शर्मा जी के द्वारा सुरु किया गया था। यह जान कर गांधी जी को खुशी हुई और उन्होंने पंडित सुन्दरलाल शर्मा जी को अपना गुरु कहा।

इसके बाद गांधी जी दुर्ग गए। यहां वे श्री घनश्‍याम गुप्‍त के आतिथ्‍य में थे। गांधी जी का यह कार्यक्रम हरिजनों के उत्‍थान हेतु आयोजित किया गया था। वहां आते ही गांधी जी ने दुर्ग में देखने योग्‍य के बारे में पूछा तो गुप्‍त जी ने उनसे उस पाठशाला का जिक्र किया जहां 1926 से सवर्ण तथा हरिजनों के बालक एक ही टाट पटटी पर बैठकर पढ रहे थे। इस पाठशाला की स्‍थापना 1925 में किया गया था।उसी दिन संध्‍या के समय दुर्ग के मोती बाग तालाब के मैदान में एक बृहद जनसभा हुइ। जनसभा में पहले शिशुपाल सिंह यादव और उदय प्रसाद श्री बोडेगांव वाले की कविता पाठ हुआ तत्‍पश्‍चात गांधी जी का भाषण हुआ।गांधी जी ने शनिचरी बाजार स्थित बैथड स्कूल में अछूत समझे जाने वाले वर्ग के बच्चों के साथ बैठकर भोजन भी किया।

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