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बैंक लॉकर में रखते हैं बेशकीमती जेवर तो यह खबर आपके लिए है, जानिए कितनी मिलेगी सुरक्षा की गारंटी

पहले का नियम देखें तो लॉकर में जो कुछ भी बेशकीमती सामान रखे जाते थे, बैंकों की तरफ से उसकी कोई गारंटी नहीं मिलती थी. RBI ने अब यह नियम बदल दिया है. नए नियम के मुताबिक लॉकर की फीस के तौर पर बैंक जो भी सालाना फीस लेते हैं, उससे 100 गुना ज्यादा तक ग्राहक को देना होगा.

अगर किसी बैंक के लॉकर में आप अपना कोई कीमती सामान जैसे कि जेवर या सोने के बिस्किट रखने जा रहे हैं या प्लान बना रहे हैं तो रिजर्व बैंक (RBI) के उन निर्देशों के बारे में जरूर जानना चाहिए जो ग्राहकों के लिए जारी किए गए हैं. यह भी जान लेना चाहिए कि बैंक में जमा आपकी संपत्ति पर बैंक कितनी गारंटी देते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि आप लॉकर लेना चाहते हैं लेकिन बैंक नहीं दे रहे, ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए.

बैंक में आपकी प्रॉपर्टी या जेवर, गहने आदि कितने सुरक्षित हैं, इसे जानने के लिए RBI की ओर से बताई गई कुछ बातों पर गौर करना होगा. रिजर्व बैंक का नियम कहता है कि जिस बैंक में लॉकर लेना चाहते हैं, उस बैंक में सीसीटीवी लगा होना चाहिए और कम से कम 180 दिनों का फुटेज बैंक के पास जमा रहना चाहिए. सुरक्षित लॉकर के लिए एक सलाह यह दी जाती है कि शहर के अंदर बैंक की ब्रांच हो, उसमें लॉकर लेना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. सुनसान या कम आबादी वाली जगहों पर लॉकर खुलवाते हैं तो चोरी-डकैती का बराबर डर बना रहेगा.

RBI का निर्देश है कि बैंकों को कम से कम 180 दिनों तक गेट की एंट्री और एक्जिट के बारे में पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग रखनी होगी. अगर बैंक किसी कारणवश लॉकर को एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर कर रहे हैं तो पहले ग्राहक को बताना होगा. ग्राहक को बिना बताए लॉकर शिफ्ट नहीं कर सकते. लगातार सुरक्षा को देखते हुए ही बैंक आजकल मॉल में अपनी शाखा खोलते हैं क्योंकि बैंक के सीसीटीवी फुटेज के अलावा मॉल की रिकॉर्डिंग अलग होती है. 24 घंटे चौकीदारी की सुविधा मिलती है.

पहले का नियम देखें तो लॉकर में जो कुछ भी बेशकीमती सामान रखे जाते थे, बैंकों की तरफ से उसकी कोई गारंटी नहीं मिलती थी. RBI ने अब यह नियम बदल दिया है. नए नियम के मुताबिक लॉकर की फीस के तौर पर बैंक जो भी सालाना फीस लेते हैं, उससे 100 गुना ज्यादा तक ग्राहक को देना होगा. उस स्थिति में अगर लॉकर की चोरी या डकैती हो जाए. अब बैंक में 500 रुपये रखें या करोड़ों का सामान, आपको चोरी या डकैती होने पर उतनी ही क्षति-पूर्ति मिलेगी जो सालाना रेंट से 100 गुना तक ज्यादा हो. मान लें आप अपने लॉकर का सालाना रेंट 100 रुपये दे रहे हैं तो चोरी की स्थिति में 100 रुपये का 100 गुनाय ज्यादा यानी कि 10 हजार रुपये मिलेंगे. यह राशि अधिकतम है. बैंक चोरी होने पर लॉकर की गारंटी तय करेंगे और उसी हिसाब से हर्जाना मिलेगा.

यहां एक बात ध्यान रखने वाली है कि प्राकृतिक आपदा से बैंक या लॉकर को नुकसान होता है तो ग्राहक को इसकी भरपाई नहीं की जाएगी. RBI ने इसे ‘एक्ट ऑप गॉड’ या दैवीय आपदा के रूप में निर्देशित किया है. इस आपदा में भूकंप, बाढ़, आकाशीय बिजली और तूफान शामिल हैं. ऐसी स्थिति में अगर लॉकर का नुकसान हो जाए तो बैंक ग्राहकों को भरपाई नहीं करते. लेकिन बैंक की इमारत में आग लग जाए या कच्ची बुनियाद होने के चलते बिल्डिंग गिर जाए और लॉकर टूट जाए तो उस केस में 100 गुना तक मुआवजा दिया जाता है.

सुरक्षा के अलावा लॉकर को सक्रिय रखना भी एक जिम्मेदारी होती है. इसके लिए ग्राहक को साल में कम से कम एक बार बैंक की ब्रांच में जरूर जाना चाहिए और अपने लॉकर को देखकर बैंक में एंट्री करा देनी चाहिए. अगर तीन साल तक लॉकर देखने ग्राहक न जाए तो वह निष्क्रिय खाते में चला जाता है. अगर 7 साल तक लगातार ग्राहक अपने लॉकर को न देखने जाएं तो बैंक अन्य अधिकारियों की निगरानी में उस लॉकर को खोल सकते हैं. लॉकर में जो कुछ भी सामान रखा गया है उसे ग्राहक को लौटा सकते हैं. फिर उस लॉकर को किसी नए यूजर को दिया जा सकता है.

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