छत्तीसगढ़देश

बस्तर के 300 आदिवासियों ने पैदल मार्च कर राजभवन के पास खोला मोर्चा, ग्राम पंचायत का फैसला वापस लेने की मांग पर अड़े

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज वो हुआ जो पहले कभी नही हुआ अचानक से राजभवन में ऐसा इसलिए हुआ क्योकि मामला आदिवासियों के हित और उनके हक से जुड़ा था. यही कारण था कि छत्तीसगढ़ की राज्यपाल ने ऐतिहासिक निर्णय लेकर राजभवन परिसर में ही आदिवासी पंचायत शुरू कर दी।

 

छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से कई नगर पंचायतों से 300 किलोमीटर पैदल चलके रायपुर पहुचे है। इनको यह अपने क्षेत्र में हुए विकास और सौगात से परेशान है। जी यह आदिवासी आने इलाके की नगर पंचायत को ग्राम पंचायत में बदलवाने की मांग को लेकर इतना सफर करके आये है . इन आदिवासियों की यह मांग क्यो है आप खुद ही सुनिए .

 

वही बस्तर से पैदल पहुचे इन आदिवासियों को सिर्फ राज्य पाल से मिलकर अपनी मांग मनवानी थी। लेकिन सबका राजभावन जाना संभव नही था। एक प्रतिनिधि मंडल राजभवन पहुचा और उन्होंने राज्यपाल से मिलकर अपनी मांग रखी और बताया कि सभी लोग पैदल चलकर बस्तर से रायपुर आये है … इतना सुनते राजपाल ने सबसे मिलने की इक्षा जाहिर की और सबके लिए राजभवन के दरवाजे खोलने का आदेश दे दिया गया। आदेश के बाद राजभवन को खोल दिया गया सभी आदिवासी परिषर में जमा हुए और राज्यपाल ने बारी बारी से सबकी बात सुनी।

चूंकि बस्तर के आदिवासी लोगो की समस्या इतनी वाजिब थी कि राज्यपाल ने खुले दिल से सबको संबोधित किया राज्यपाल ने कहा की आप थोड़ा धैर्य रखिए पांचवी अनुसूची में बिना राज्यपाल की अनुमति के नगर पंचायत नगर पालिका बनाना अवैधानिक है जब से मैं आई हूं तब से कह रही हूं कि वर्तमान और पूर्व की सरकार ने बहुत गलत किया है. मैंने बार-बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है.

 

बता दें छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्यपाल ने समस्या लेकर आए लोगों के लिए राजभवन के दरवाजे खुलवाने का आदेश दिया। और तहे दिल से सब को संबोधित किया राज्यपाल ने संबोधन में वर्तमान और पूर्व सरकार को गलत भी ठहराया बावजूद इसके इतनी मेहनत का कोई नतीजा सकारात्मक नहीं निकला क्योंकि आदिवासी अभी भी अपनी मांग पर अड़े हुए है। और कह रहे है कि उनको नगर पंचायत नही बल्कि ग्राम पंचायत ही लौटा दी जाए.

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