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NAVRATRI SPEACIAL : महानमवी के अवसर पर माँ महामाया और माँ समलेश्वरी का ‘’वीर मुद्रा’’ में हुआ भव्‍य शस्‍त्र श्रृंगार, 6 माह में 1 बार होता है यह श्रृंगार

 

रायपुर, अखिल शर्मा। शारदीय नवरात्रि पर्व की आज नवमी तिथि है। इस अवसर पर आज छत्तीसगढ़ के राजधानी में विराजीं माँ महामाया और माँ समलेश्वरी का ‘’वीर मुद्रा’’ में भव्‍य शस्‍त्र श्रृंगार किया गया है। माँ आज अपने पूरे आठों हाथों में शस्‍त्र धारण की हुई हैं जो बेहद ही आर्कषक व दुर्लभ दिखाई पड़ रहा है।

माँ महामाया

 

 

 

महामाया मन्दिर के पुजारी पण्डित मनोज शुक्ला ने बताया कि यह शस्त्र श्रृंगार हर साल केवल 2 बार ही किया जाता है। एक चैत्र नवरात्रि और दूसरा शारदीय नवरात्रि में यह श्रृंगार माता को समर्पित किया जाता है। पुजारी ने बताया की नवरात्री पर्व में ज्योति विसर्जन के दूसरे दिन अर्थात कन्या पूजन राजभोग वाले दिन ही माँ का यह विशेष शस्त्र श्रृंगार किया जाता है।

माँ समलेश्वरी

 

कन्या पूजन व राजभोग

प्राचीन परम्परा के अनुसार हर वर्ष चैत्र नवरात्री और शारदीय नवरात्री में महामाया मन्दिर में ज्योति विसर्जन के बाद ही कन्या पूजन किया जाता है, कन्या पूजन के समय मन्दिर परिसर में जितनी भी संख्या में माँ के रूप में कन्या और भैरव रूप में छोटे बच्चे उपस्थित रहते थे सभी की विधि विधान से पूजा करके उन्हें भोजन कराया जाता है।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि कन्या पूजन के बाद माँ कि मध्यान्ह आरती होती है जो कि नवरात्रि के सम्पन्न होने वाली मध्यान्ह महाआरती होती है। इसके पश्चात माता को राजभोग लगाया जाता है। ऐसे तो नवरात्री के 9 दिन माँ को केवल मध्यान्ह में फलाहारी भोग ही लगता है, किन्तु आज से माता जी को समस्त प्रकार के षडरस व्यंजन का भोग लगाया जाता है। फिर 9 दिन रात तक लगातार खुली रहने वाला मन्दिर कुछ समय विश्राम के लिये बन्द कर दिया जाता है।

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