छत्तीसगढ़

एक बार फिर आपस में भिड़े कांग्रेसी, बैनर पोस्टर को लेकर हुआ विवाद

सरगुजा। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पाण्डेय आज अंबिकापुर दौरे पर हैं। इसी बिच वहां से बड़ी खबर आयी है की कांग्रेसी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए हैं। दोनों पक्षों के बीच बैनर पोस्टर को लेकर विवाद हुआ है।

जानकारी के अनुसार टीएस सिंहदेव समर्थक और अमरजीत समर्थकों के बीच ये विवाद हुआ है। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के बैनर पोस्टर फाड़ दिए। कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में तनाव का माहौल है। विवाद की स्थिति को देखते हुए दल बल के साथ पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंच गए हैं। फ़िलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

कांग्रेस में बीते कई दिनों से चल रही अंदरूनी कलह

बता दें कि राजधानी रायपुर में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में पार्टी के दो कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के सामने ही प्रदेश महामंत्री अमरजीत चावला और सन्ननिर्माण कर्मकार मण्डल के अध्यक्ष सन्‍नी अग्रवाल आपस मे भिड़ गए। दोनों के बीच गाली-गलौच और झूमा-झटकी हुई। प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम और प्रदेश महामंत्री चन्द्रशेखर शुक्ला को बीच-बचाव करना पड़ा। इस घटना के एक दिन पूर्व ही राजीव भवन में ही एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं के बीच आपस मे मारपीट हुई थी।

जशपुर से शुरू हुआ आपसी झड़प का सिलसिला

25 अक्टूबर को जशपुर से कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं की आपसी झड़प का सिलसिला शुरू हुआ है। 25 अक्टूबर को जशपुर में प्रदेश प्रभारी सचिव सप्तगिरी शंकर उल्का की उपस्थिति में कार्यकर्ता ससम्मेलन का आयोजन किया जा रहा था, तभी सीएम के ढाई-ढाई साल के कार्यकाल के मुद्दे पर सीएम भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के समर्थक मंच पर ही उलझ गए थे।

इसके बाद 29 अक्टूबर को राजीव भवन ने ही एनएसयूआइ के राष्ट्रीय सध्यक्ष नीरज कुंदन के सामने एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं के बीच लात-घूंसे और बेल्ट चले थे। और इसके 24 घंटे के अंदर ही इस तरह की दूसरी घटना से संगठन की छवि पर धब्बा लग गया है।

पिछले कई समय से कांग्रेस के बीच आपसी गुटबाजी को लेकर लगातार मारपीट धक्का-मुक्की गाली गलौज और आपसी खींचतान एक दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक स्थल पर अभद्र व्यवहार जैसी बातें आम हो गई हैं। छत्तीसगढ़ में जिस तरह से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के आपस मे भिड़ने की घटना हो रही है, उससे यही लग रहा है कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता बेलगाम हो गए हैं।

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