छत्तीसगढ़

अपने अतीत को पहचानना होगा, तब बढ़ेंगे आगे: मोहन भागवत

बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत आश्रम मदकूद्वीप पहुंचे हैं। इस अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि हमे अपने अतीत को पहचानना होगा जिसे हम भूल चुके है उसके बाद ही हम पुनः विश्व गुरु बनने के मार्ग में आगे बढ़ सकते है।

अपनी कही हुई बात को सिद्ध करने के लिए मोहन भागवत ने स्वामी विवेकानंद की एक कहानी बताई जिस कहानी में बकरियों के बीच पले शेर के बारे में बताया गया जो स्वयं को और अपनी ताकत व सामर्थ्य को भूल चुका था, बाद में उसे अहसास हुआ कि इसी तरह हमें स्वयं को पहचानना होगा। हम संपूर्ण दुनिया को कुटूंब मानने वालों में से हैं। अब भले ही दुनिया आगे बढ़ चुकी है पर हम भी अब उनसे कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। वे चंद्रमा पर पहुंच चुके हैं तो क्या हुआ हम भी वहीं जाएंगे। हमारा धर्म वह है जो पर्यावरण के साथ रहना सिखाता है। विविधताओं के बाद भी साहचर्य सिखाता है। अच्छा मनुष्य बनाता है। जो किसी भी धर्म को पराया नहीं मानता है। इसे आजकल हिंदू धर्म कहा जाता है।

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