कोरोना वायरस और ग्रहो की युति, किन ग्रहों के कारण आया कोरोना वायरस आया?

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योत विशेषज्ञ) छतरपुर मध्यप्रदेश:

ज्योतिष के अनुसार कुल 9 ग्रह होते है। जो किसी न किसी रूप में व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते है। अगर ग्रहो की चाल सही न हो, तो ऐसी परिस्थिति में वो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकते है।

वर्तमान के परिपेक्ष में देखे तो विश्व के कई देश कोरोना वायरस की चपेट में है। भारत में भी इसके कई मामले देखने को मिल गए है।

इस लेख में हम ज्योतिषीय दृष्टि कोण के अनुसार, विश्लेषण करेंगे की कोरोना वायरस के फैलने के पीछे मुख्यतः क्या कारण है। भारत में इसका प्रभाव कैसा होगा। और कब तक रहेगा।

कोरोना वायरस और ग्रहो की युति

सर्वप्रथम, परिधावी नाम्नी सवंत्सर, ही एक ऐसा सवंत्सर है। जिस में महामारी का प्रकोप आया है। ज्योतिष शास्त्रो में कुल 60 सवंत्सर होते है। परिधावी सवंत्सर 46 मा सवंत्सर है। तथा 25 मार्च 2020 से प्रमादी सवंत्सर प्रारम्भ हो जाएगा। जो 47 मा सवंत्सर है। इस प्रकार की जानकारी ज्योतिष विशेषज्ञ पहले ही लिख चुके है। पंचांग में 2019 में महामारी का प्रकोप रहेगा, यह जानकारी कोरोना वायरस आने से पहले ही ज्योतिष विद्वानों ने दी थी,

कोरोना वायरस लगभग पूरे विश्व में फैला हुआ है। 2019 में ग्रहण काल से ही कुछ अंदेशा था क्योंकि, यह कहीं न कहीं राहु और केतु से जुड़ा हुआ है।

गुरु जीव कारक ग्रह है, और वह काफी समय से राहु से दृष्ट है और केतु के साथ है। वह भी सप्तम दृष्टि से राहु से ग्रसित है। यह बात अलग है।, लेकिन सभी ग्रह अपने से सप्तम दृस्टि रखते है। फिर भी इसकी सप्तम दृष्टि सबसे ज्यादा प्रभावी होती है। यह प्राय ज्योतिष की पुस्तक लघुपाराशरी में दिया गया है। सभी ग्रहों की सप्तम द्रष्टि होती है। इसी कारण से राहु की भी सप्तम दृष्टि गुरु ग्रह वृहस्पति पर है।

राहु इस समय अपनी उच्च राशि में गोचर कर रहा है। अतः उनके नकारात्मक और सकारात्मक फल ज्यादा प्रभावी होना स्वाभाविक है।

वर्तमान राहु गोचर को देखा जाए तो, जब से राहु आद्रा नक्षत्र में गोचर में आया है। तभी से यह बीमारी प्रारम्भ हुई है। यह बीमारी ज्यादा प्रभाव में आई है। क्योंकि, यह नक्षत्र स्वयं राहु का नक्षत्र हैl अतः इस नक्षत्र में राहु ज्यादा ही प्रभावी होता है। हिंदू मान्यता के अनुसार आद्रा नक्षत्र का संबंध गुरु की दूसरी पत्नी तराका के साथ है जिसे ब्रह्मा से अखंडनीयता का वरदान प्राप्त है। तराका को कथा में एक असुर बताया गया है।

राहु मिथुन राशि में है जो काल पुरुष की कुंडलीका तृतीय भाव है। जो छोटी यात्रा और जनसंपर्क का भाव कहा गया है। कोरोना के फैलने का कारण यही है।

राहु की सप्तम दृष्टि नवम भाव यानी धनु पर है। जिसका संबंध धर्म और लंबी यात्रा और सामूहिक समारोह का भी है। अतः यह महामारी लोगों को इससे रोक रही है। राहु का आद्रा नक्षत्र में गोचर 17 मई 2020 तक है। दिनांक रविवार 17 मई 2020 तक है। अतः 17 मई 2020 तक सतर्क रहने की आवश्यकता है। सतर्क रहें और स्वस्थ रहें।

इसके राहु के अलावा इसे केतु से भी जोड़ कर देखा जा सकता है क्योंकि, केतु एक वायरस है जो जहरीले जानवर से उत्पन्न होता है। तथा केतु और गुरु ने आपस में चाण्डाल योग है, जिस के कारण कोरोना वायरस (महामारी) का प्रकोप अधिक मात्रा में है।

ज्योतिषीय उपाए,
हल्दी का सेवन अधिक मात्रा में करे,
घर मे प्रति दिन गंगा जल का छिङकाओ करे,
धूप और कपूर का धुआं अपने घर में करे,
पानी अधिक मात्रा में पीए

यदि आप अपनी किसी समस्या के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) नि:शुल्क ज्योतिषीय सलाह चाहें तो वाट्सएप नम्बर 9131366453 पर सम्पर्क कर सकते हैं।